बाबा साहब डॉ भीमराव अंबेडकर जी के विचारों पर आधारित फाउंडेशन
1. जो लोग जाती का संगठन बनाते है वो अपनी जाती को मजबूत करते है , ओर जो जाति को मजबूत करते है बो ब्राह्मण वाद को मजबूत करते है, वो अपनी गुलामी को मजबूत करते है, इतना ही नहीं बल्की अपनी गुलामी को खरीदते है ओर
2. हम महसूस करते हैं की हमारे अतिरिक्त हमारे दुख दर्द को कोई भी दूर नहीं कर सकता और जब तक राजनीतिक शक्ति हमारे हाथों में नहीं आ जाती तब तक हम भी उसे दूर नहीं कर सकते
3. जब तक सार्वजनिक सेवा में हिंदुओं का प्रभुत्व रहेगा तब तक अस्पृश्य लोग पुलिस से कभी सुरक्षा की आशा नहीं कर सकते, न्यायपालिका से भी न्याय की आशा नहीं कर सकते,और प्रशासन से भी कुछ नहीं पा सकते , सार्वजनिक सेवाओं में क्रूरता से अस्पृश्यों को तभी मुक्ति मिल सकती है जब कार्यकारी पदों पर अस्पृश्यों की नियुक्ति की जाए
4. राजनीति एक ऐसी मास्टर चाबी है जिससे हर समस्या का ताला खोला जा सकता है
5. मैंने आपको एक ऐसा महान शस्त्र दे दिया है, जो हिंदुओं के ब्रह्मास्त्र से भी बड़ा है, लेकिन इसको चलाने वाला परफेक्ट होना चाहिए, अन्यथा यह आपके लिए भी घातक हो सकता है
6. जिन्हें हम आज राज सिंहासन पर बैठा कर शक्ति और प्रभुत्व देने में सहायक हो रहे हैं कल उन्हें उस राज्य सिहासन से उतरने की शक्ति भी हमारे हाथों में होना चाहिए
7. हमें तीसरी शक्ति के रूप में संगठित होना है, अर्थात यदि कांग्रेस या समाजवादियों के पास संपूर्ण बहुमत नहीं होगा तो वे चुनाव में हमारे पास वोट की भीख मांगने आएंगे, ऐसे वक्त हम इन दोनों पार्टियों में शक्ति संतुलन का काम कर सकेंगे , तथा अपनी राजनीतिक और सामाजिक उन्नति के लिए उन पर कुछ शर्ते लाद सकेंगे
8. केवल निर्वाचक होना ही पर्याप्त नहीं है,कानून निर्माता होना भी जरूरी है, अन्यथा जो कानून निर्माता हो सकता है वह उनका स्वामी होगा जो केवल निर्वाचक ही हो सकता है
9. वर्तमान स्वराज उनके लिए (मनुवादियों) स्वराज है हम अभी भी गुलाम ही हैं यदि हम मनुष्य के रूप में जीवन व्यतीत करना चाहते हैं तो हमें अपने पैरों पर खड़ा होना ही होगा, खोए हुए अधिकार कभी भी भीख मांग कर अथवा अधिकारों का हनन करने वाले लोगों से प्रार्थना करके या उनके चमचे बनकर प्राप्त नहीं किए जा सकते, उनके लिए हमें निरंतर संघर्ष करना होगा
10. विद्वान व्यक्ति झूठा, कपटी, हस्तक्षेप करने वाला लुड बुढ़िया हो सकता है, वह दुर्गुणों की खान भी हो सकता है, अत उससे सावधान रहे राजनीतिक सत्ता जब तक अपने हाथों में नहीं आती है तब तक दलित निवारण का कार्य नहीं हो सकता , वेशभूषा या परिधान में सुधार करने को तरक्की नहीं माना जा सकता, सच्ची तरक्की राजनीतिक सत्ता मिलने के बाद आती है
11. जब तक दबे, कुचले, अपमानित, उपेक्षित व सताए गए लोग स्वयं जागृत नहीं होते और अपने अंदर छिपी हुईं शक्तियों का प्रदर्शन नहीं करते तब तक वे अन्याय, अत्याचार, शोषण ,गुलामी से मुक्ति नहीं पा सकते
12. जाति के आधार पर किसी को ऊंचा मानना पाप है तथा अपने को नीचा मानना माहपाप है, तुम अपने वोट से खुद राजा बन सकते हो, तुम्हे जो आरक्षण मिला है वह किसी की दया की भीख नहीं है यह तो तुम्हारा अधिकार है
13. राजा बनने के लिए रानी के पेट की जरूरत नहीं है, तुम्हारे वोट की जरूरत है तुम्हारी लड़ाई चंद अधिकारों की नहीं यह तो आजादी की लड़ाई है इस लड़ाई के लिए तुम्हे मैने महान अस्त्र दिया है, जो तुम्हें हिंदुओं के ब्रह्मस्तर से भी बड़ा है , वो है एक वोट एक व्यक्ति का अधिकार
14. दलित यदि कांग्रेस में सम्मिलित हो जाए तो वह राजनीतिक शक्ति प्राप्त नहीं कर सकता कांग्रेस एक बहुत बड़ा संगठन है यदि हम उसमें प्रवेश करेंगे तो समुद्र में बूंद गिरने के समान होगा , कांग्रेसी लोग अत्यंत अहंकारी है उस कांग्रेस में गए तो उससे आपके शत्रु की ही शक्ति बढ़ेगी
15. कांग्रेस एक जलता हुआ घर है उसमें रहकर आपका किसी प्रकार का कल्याण नहीं हो सकता, मुझे आश्चर्य नहीं होगा यदि कुछ ही वर्षों में यह समाप्त हो जाए
16. छोटे छोटे लालचों और प्रलोभनों को त्यागना होगा, सत्ता की चाबी तभी मिल सकती है, जब हम सब मिलकर छोटे-छोटे लालचों और प्रलोभनों को त्याग कर अधिक से अधिक लोगों तक तथागत गौतम बुद्ध , छत्रपति शाहूजी महाराज , बाबा साहब डॉ.भीमराव अंबेडकर जी के संघर्षों एवं संदेशों को बहुजन समाज तक पहुंचाए (मान्यवर साहब कांशीराम जी)
17. स्वयं अपने समय का इतिहास लिखने वाले व्यक्ति को यह आशा नहीं रखनी चाहिए कि उसकी उन सभी बातों पर कड़ी आलोचना होगी जो उसने लिखी है और जो उसने नहीं लिखी है परंतु इन छोटी-छोटी वादाओ से ऐसे व्यक्ति को निरुत्साहित नहीं होना चाहिए जो सच्चा तथा स्वतंत्रता का हिमायती है (मान्यवर साहब काशीराम जी)
18. अगर कोई सरकार जनता को उसके मूलभूत अधिकारों से वंचित रखती है तो जनता का केवल यह अधिकारी ही नहीं बल्कि उसका कर्तव्य भी है, कि वह ऐसी सरकार को तबाह कर दे (शहीदे आजम भगतसिंह )